7 types fishes are return in varanasi ganga river after a long time
7 types fishes are return in varanasi ganga river after a long time

वाराणसी में गंगा में नाविकों को दुर्लभ प्रजाति की मछली मिली है। बीएचयू के मछली विज्ञानी के मुताबिक इस मछली को प्लेको बोलते हैं। गंगा में प्लैको मछलियों का मिलना चिंताजनक हैं। जहां यह मछलियां नदियों में छोटे जीवों को खा जा रही है। वहीं गंगा निर्मली करण की दिशा में भी चुनौती बन सकती है।

हालांकि भारत सरकार के मत्स्य विभाग की शोध टीम ने अभी तक गंगा में किसी नई मछली की प्रजाति को चिन्हित नहीं किया है। बृहस्पतिवार को बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग मे मत्स्य विज्ञानी प्रोफेसर बेचन लाल ने बताया कि गंगा प्रहरी दर्शन निषाद गंगा में मिली मछली को लेकर आए थे। प्रो. बेचन लाल ने बताया कि इस तरह की मछलियां पिछले कई दिनों से गंगा व उसकी सहायक नदियों में पाई जा रही है। उसने इसके बारे में जानकारी जननी चाही इसी वजह से जांच के लिए लेकर आए हैं।

प्रो. बेचन लाल ने लखनऊ स्थित नेशनल ब्यूरो आफ फिश जेनेटिक रिसोर्स एनबीजीआरएफ के निदेशक डॉक्टर केके लाल से प्लेको मछलियों के बारे में बातचीत भी की।

उन्होंने बताया कि आमतौर पर इन मछलियों को लोग एक्वेरियम में रखते हैं। छोटी होने पर तो यह अच्छी लगती है लेकिन बड़ी होने पर इसे गंगा में छोड़ दिया जाता है। खाने में स्वाद ठीक ना होने की वजह से खाया भी नहीं जाता। यह मांसाहारी मछलियां है, इसी वजह से जलीय जीवों को इनसे खतरा भी है।

नदी विज्ञानी प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा में इस तरह की मछलियों का मिलना चिंताजनक हैं। पिछले कुछ दिनों से मछलियों का मिलना अजीब घटना है।

गंगा में शोध करने वाली संस्था मत्स्य विभाग की ओर से अब तक मछली की किसी भी प्रजाति की लिस्टिंग नहीं की गई है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा प्रहरी द्वारा नई नई प्रजातियों का मिलना गंभीर और जांच का विषय है इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।